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इलाहाबाद (प्रयागराज) के अर्द्ध कुंभ मेले में आध्यात्मिकता का अनुभव करें

Image courtesy: ©Sanjoy Ghosh

कुंभ मेला पृथ्वी पर सबसे विशाल धार्मिक मण्डली है। यह विशाल उत्सव लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, जिसमें विभिन्न हिंदू मठों के साधु शामिल हैं। कुंभ मेला किसी विशेष जाति या पंथ से संबंधित नहीं है – हिंदू धर्म की सभी शाखाओं के भक्त जन विश्वास की विद्युतीय संवेदना का अनुभव करने और पवित्र गंगा, शिप्रा या गोदावरी नदियों में डुबकी लगाने के लिए आते हैं।

कुंभ हर 12 साल में और अर्ध कुंभ हर 6 साल में आयोजित किया जाता है। इस साल का अर्ध कुंभ उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर इलाहाबाद (प्रयागराज) में आयोजित किया जाएगा। यह मंगलवार, 15 जनवरी से शुरू हो रहा है और 4 मार्च, 2019 तक जारी रहेगा।

इस उत्सव की उत्पत्ति अच्छे और बुरे के बीच वर्चस्व की लड़ाई है। हिंदू निर्माण मिथकों में, देवताओं और राक्षसों ने एक कुंभ (घड़े) के लिए एक महान लड़ाई लड़ी जिसमें अमरता का अमृत था। विष्णु ने घड़े को पकड़ लिया और उसे दूर फेंक दिया, लेकिन उड़ान में चार बूंदें इन स्थानों पर गिर गईं – इलाहाबाद, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन। इन शहरों में समारोह लगभग छह सप्ताह तक चलते हैं, और आम तौर पर शुभ स्नान दिवस केवल छह होते हैं।

यह स्पष्ट है कि कुंभ कई वर्षों से चार स्थानों पर औपचारिक रूप से आयोजित किया जा रहा है, लेकिन इसका पहला उल्लेख चीनी यात्री ह्वेन-त्सांग की डायरी में मिलता है। उन्होंने कुंभ मेले का विस्तृत ब्यौरा दिया है, जहाँ पवित्र डुबकी के लिए इलाहाबाद में गंगा नदी के तट पर लाखों लोग एकत्र हुए थे।

हमेशा की तरह, इस साल भी कुंभ तीर्थयात्रियों के लिए एक भव्य समारोह होगा।

इस भव्य उत्सव में भाग लेना यात्रियों के लिए एक उल्लेखनीय अनुभव होगा।