होली: भारत का रंगीन उत्सव

Image courtesy: ©Abhishek Hajela

रंगों का त्यौहार होली, पूरे भारतवर्ष में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा देश वसंत के स्वागत में शामिल हो गया हो।

इतिहास

अधिकांश भारतीय त्योहारों की तरह, होली का इतिहास कई किंवदंतियों से जुड़ा हुआ है। सबसे प्रसिद्ध- राजा हिरण्यकश्यप और उनके पुत्र प्रह्लाद, जो भगवान विष्णु के भक्त थे, की कहानी है। जब प्रह्लाद ने अपने पिता के अधर्म को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो राजा ने उसे मारने की कोशिश की। कई प्रयासों के बाद, हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की गोद में युवा प्रहलाद को बिठा कर उन दोनों को जलाने का फैसला किया। ऐसा कहा जाता है कि होलिका तुरंत ही विसर्जित हो गई, जबकि ज्वाला ने प्रह्लाद को छुआ तक नहीं।

इस कथा के साथ, होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिनिधित्व करती है। यह दिन वसंत के आगमन की भी याद दिलाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान कृष्ण भी त्योहार से जुड़े हैं, क्योंकि वे अक्सर गोपियों के साथ रंग और पानी से खेलते थे। यह प्रथा सदियों से पूरे देश में प्रचलित है।

विशेष शहरों में होली

होली मनाने के लिए सबसे प्रसिद्ध शहर देश के उत्तरी भाग में हैं। मथुरा, वाराणसी, वृंदावन, शांति निकेतन और दिल्ली होली मनाने के लिए सबसे लोकप्रिय स्थल हैं। इन स्थानों में, मथुरा की होली सबसे प्रसिद्ध है। यहाँ, आस-पास के गाँव लठमार होली मनाते हैं, जिसमें बरसाना की महिलाएं नंदगांव के पुरुषों को लाठियों से पीटती हैं। यह प्रथा इन गांवों के लिए अद्वितीय है।

वाराणसी और वृंदावन जैसे स्थानों में, यह त्यौहार गीत और नृत्य के साथ बहुत रंगीन होता है। भाँग एक आवश्यक घटक है, जो आम तौर पर घरों में भी परोसी जाती है। दिल्ली में, कई होली पार्टियों का आयोजन किया जाता है, जिसमें हर उम्र के लोग इकट्ठा होते हैं।

नोट: होली के दौरान किसी यात्री की सुरक्षा अराजकता के कारण खतरे में हो सकती है। सुनिश्चित करें कि आपके पास आपका साथ देने के लिए एक विश्वसनीय स्थानीय संसाधन हो, खासकर यदि आप होली खेलने के लिए स्थानीय लोगों के साथ जुडना चाहते हैं।